यह टीम अत्याधुनिक मशीनों और तकनीकी उपकरणों के साथ पानी की गहराई में उतरकर बांध की संरचनात्मक स्थिति का परीक्षण करेगी, ताकि रिसाव की वास्तविक वजह और संभावित खतरे का सटीक आकलन किया जा सके।
सतही जांच में नहीं मिले ठोस सुराग
प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक अब तक की गई सतही जांचों में रिसाव के मूल कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। यही वजह है कि अब बांध की दीवारों, उनके जोड़ों और नींव की गहराई तक जांच जरूरी हो गई है। मुंबई से आने वाली विशेषज्ञ टीम पानी के भीतर जाकर यह जांचेगी कि कहीं दीवारों में दरारें तो नहीं हैं या फिर पानी का अत्यधिक दबाव संरचना को कमजोर तो नहीं कर रहा।
जांच पूरी होने के बाद टीम एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें रिसाव रोकने के उपाय, अपनाई जाने वाली आधुनिक तकनीक और संभावित खर्च का पूरा ब्यौरा शामिल रहेगा।
अत्याधुनिक तकनीक से होगा बांध का परीक्षण
बांध की जांच के लिए चार प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी विधियों का सहारा लिया जाएगा।
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प्रशिक्षित विशेषज्ञ गोताखोर सुरक्षा उपकरणों के साथ पानी के भीतर जाकर दीवारों के जोड़ों और नींव का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेंगे।
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अत्यधिक गहराई या जोखिम वाले क्षेत्रों में रिमोट कंट्रोल रोबोट तैनात किए जाएंगे, जो कैमरों और सेंसर की मदद से संकरी जगहों की फुटेज और डेटा जुटाएंगे।
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उन्नत तकनीक से पानी के भीतर संरचना की मैपिंग की जाएगी, जिससे नींव के नीचे मिट्टी के बहाव या खोखलेपन का पता लगाया जा सके।
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बांध में लगे विशेष उपकरणों से पानी के दबाव और रिसाव की गति का आकलन कर भविष्य में किसी बड़े खतरे की आशंका का पूर्वानुमान लगाया जाएगा।
गौरतलब है कि नर्मदा नदी पर बना बरगी बांध न केवल सिंचाई और बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में इसकी सुरक्षा से जुड़ी यह जांच प्रशासन और आम जनता—दोनों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
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